योगी के भाषण को भड़काऊ बताने वाली मीडिया पर बरसे मीलॉर्ड, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला!

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में मीडिया पर एक मामले में रिपोर्टिंग करने पर रोक लगा दी है। जी हां हाईकोर्ट ने 2008 के गोरखपुर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए भड़काऊ वाले भाषण मामले पर रिपोर्टिंग करने से मना किया है।

हाल ही मे एक आदेश में, उच्च न्यायालय के दो न्यायाधीशों कृष्ण मुरारी और अखिलेश चंद्र ने इसपर फैसला सुनाया। उन्होंने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी भी विषय पर गलत रिपोर्टिंग करने से लोगों पर इसका गलत प्रभाव पड़ता है साथ ही उन्होंने गलत रिपोर्टिंग से प्रदेश की छवि खराब होने की बात भी कही।

प्रदेश सरकार के विरोध के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला

एक साइट् में छपी खबर की माने तो इलाहाबाद हाईकोर्ट में राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए एडिशनल एडवोकेट जनरल मनीष गोयल ने कहा कि कई बार गलत रिपोर्टिंग करते हुए देखा जाता है, न तो कोई सुबूत होता है न कोई सच। बिना तथ्यों की खबरें दिखायी जाती है।

मनीष गोयल में पूर्व में छपी तथ्यहीन खबरों की तरफ अदालत का ध्यान दिलाया। जिसके बाद कोर्ट ने मीडिया पर रोक लगाते हुए फैसला सुनाया, कहा कि जबतक कि पूरे मामले का फैसला नहीं आ जाता तब तक मीडिया इस मामले पर कोई भी रिपोर्टिंग नही करेगी।

आधिकारिक सूत्रों ने योगी का पक्ष लेते हुए बताया कि इलाहाबाद के स्थानीय अखबारों और राष्ट्रीय अखबार गोरखपुर मामले में बिना सिर पैर की रिपोर्टिंग करते रहे हैं।जिससे काफी लोग प्रभावित हो रहें थे, जिसकी वजह से इलाहाबाद कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया गया है।

गोरखरपुर दंगों के खिलाफ यह याचिका गोरखपुर के रहने वाले परवेज परवाज और असद हयात की ओर से दायर की गई है। परवाज इस दंगे के बाद गोरखपुर में दर्ज कराई गई एफआईआर में शिकायतकर्ता हैं, जबकि हयात गवाहों में से एक हैं।

इसी साल मार्च में प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से पांच बार सांसद रहे हैं. एफआईआर में उन्हें गोरखपुर की तत्कालीन मेयर रहीं अंजू चौधरी और स्थानीय विधायक रहे राधा मोहनदास अग्रवाल के साथ नामजद किया गया है।

क्या है गोरखपुर मामला?
जनवरी, 2007 में युपी के गोरखपुर शहर में दो समुदायों के बीच दंगा भड़क उठा था। जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। पुलिस के मुताबिक यह विवाद मुहर्रम पर ताजिए के जुलूस के रास्ते को लेकर शुरु हुआ था।

इस मामले में तत्कालीन बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ, स्थानीय विधायक राधा मोहन दास अग्रवाल और उस समय शहर की मेयर रही अंजू चौधरी पर आरोप है कि इन लोगों ने पुलिस के मना करने के बावजूद रेलवे स्टेशन के पास भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद यह दंगा भड़क उठा था।

जिसकी वजह से दंगे के बाद युपी के वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ के ऊपर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। अगर खबर की माने तो मुख्यमंत्री योगी मुख्य आरोपी हैं, अगर ऐसा हुआ तो राज्य की छवि को काफी नुकसान पहुंच सकता है।