ABP न्यूज़ के फर्जी ओपिनियन पोल के बाद गुजरात का ज़मीनी सर्वे सामने, दिलचस्प हैं आँकड़े!

गुजरात में विकास को पागल समझने वालों को गुजराती समाज एक बार फिर से खारिज करने वाला है।पिछले दो दशकों से सत्ता पर काबिज भाजपा गांधी नगर में एक बार फिर सरकार बनाने को जा रही है।3 दिन गुजरात में गुजारने के बाद हमारे सूत्रों को वहां भाजपा के विरोध में स्वर भले मिले हो लेकिन नरेंद्र भाई दामोदर दास मोदी का विरोध करने वाला अब तक नहीं मिला। ऐसा नहीं है कि कुछ मुद्दों पर प्रदेश सरकार से शिकायत नहीं है लेकिन उससे ज्यादा तो खीझ इस बात की है कि ऐसे लोग गुजरात को पिछड़ा हुआ और विकास को पागल करार दे रहे हैं जिनके खुद के राज्य में विकास अब तक खड़ा भी नहीं हो पाया है।

सूरत के एक कामरेज से इलाके में चाय पान की दुकान पर हम खड़े हैं।यहां जो भीड़ है उसने लगातार लोग पाटीदार समाज के हैं।शिकंजी पीते हुए हार्दिक पटेल और उनके पाटीदार आंदोलन पर लंबी बातचीत हुई।जयेश भाई का कहना था कि आंदोलन का गुब्बारा पूरी तरह से टूट चुका है। दूसरे कहते दिखे की जीएसटी से लोगों में थोड़ी परेशानी तो थी लेकिन 10 तारीख को गुवाहाटी में हुई बैठक के बाद यह भरोसा हो गया कि सब कुछ दुरुस्त होने वाला है। परेशानियां कम हुई है।अब परेशानी उन लोगों को है जो अभी तक एक टका भी टेक्स सरकार को नहीं देते थे और कच्चे में ही काम करते थे।हम जैसे लोगों की क्या परेशान?

दिलचस्प बात यह है कि सूरत के मेहसाणा जिला में पाटीदार आंदोलन का असर था लेकिन अब उस आंदोलन की हवा निकल चुकी है।हार्दिक पटेल के नए-नए किस्से जनता के बीच चटकारे वाले गप्पों का हिस्सा बन चुके हैं।जयेश भाई जो खुद पाटीदार हैं कहते हैं कि पाटीदार समाज में अब मोदी के प्रति कोई नाराजगी नहीं है।रही आरक्षण की बात तो वह जनता है जो जानती है कि कांग्रेस आरक्षण का झुनझुना बजा रही है।

पिछले चुनावों में सूरत की 16 सीटों में से 13 भाजपा के खाते में गई थी।कामरेज वह इलाका है जहां से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित भाई शाह के विरोध के बाद अपनी सभा बीच में छोड़कर जाना पड़ा था।परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का भी कमोबेश वही हाल हुआ था लेकिन उस घटना को लेकर अब तक 1 महीने का लंबा अरसा बीत चुका है।पाटीदार समाज में जो आक्रोश भाजपा के प्रति था उसका पारा धीरे धीरे नीचे आ चुका है।हार्दिक और कांग्रेस का मुलम्मा उतर चुका है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि जिग्नेश मेवानी के साथ अल्पेश ठाकुर को जो कांग्रेस क्या कर पाते हैं हालांकि आपको जानकारी के लिए बता दे कि दलित वोट हमेशा से ही कांग्रेस के खाते में रहा है फिर भी कांग्रेस सत्ता से बाहर ही रही है और गुजरात में दलितों की जनसंख्या भी केवल 7% है वही राजपूतो में भी अल्पेश ठाकुर के आवाहन का कोई खास असर नहीं दिखता। यहां पर इस चुनाव और उसका रिजल्ट आईने की तरह साफ है कि गुजरात में एक बार फिर से भाजपा अपनी सरकार बनाने जा रही हैं और राहुल गांधी के नेतृत्व पर एक बड़ा प्रश्न चिन्ह होगा।3 बैसाखियों को लगाने के बावजूद राहुल कांग्रेस की नैया पार नहीं लगा सके।