कठुआ मामले में पीड़ित की पहचान उजागर करने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इन बड़े मीडिया घरानो पर लगाया 10-10 लाख का जुर्माना!

आठ वर्षीय बच्ची के शव पर बहुत से राजनितिक गिद्ध और बहुत से घटिया मानसिकता वाले लोग रोटियां सेंक रहे है, यक़ीनन इस बच्ची के शव को नेता, मीडिया और ये JNU के बुद्धिजीवी मिलकर नोच रहे है, कोई पैसे की उगाही कर रहा है, तो कोई वोट की राजनीती कर रहा है तो कोई नफरत भरा एजेंडा चला रहा है. असली सच्चाई का पता तो तभी लगेगा जब इस घटना और मामले की जाँच सीबीआई द्वारा की जाएगी। तभी इसकी पार्टी खुलेंगी की असली दोषी कौन है।

भारत की मीडिया को अच्छे से पता है की रेप पीडिता की पहचान, उसके परिवार की पहचान को उजागर नहीं किया जाता है, पर कठुवा के मामले में मीडिया ने एजेंडा चलाया और लड़की की पहचान उजागर कर डाली, उसके साथ के लोगों की पहचान उजागर की और खूब मनगढ़ंत एजेंडा चलाया, JNU के लोगों ने तो लड़की के नाम पर 40 लाख रुपए से ज्यादा लोगों से चंदे के रूप में जमा कर लिए, जबकि 1 भी रुपए लड़की के परिजनों को नहीं दिया!

मीडिया की इस शर्मनाक हरकत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया और कई मीडिया हाउसेस को कोर्ट ने नोटिस जारी किया जिन्होंने लड़की की पहचान को उजागर किया था, ये एक कानूनन अपराध है, अब इस मामले में कोर्ट द्वारा मीडिया पर पहली मार की गयी है, दिल्ली हाई कोर्ट ने लड़की की पहचान को उजागर करने वाली मीडिया पर 10-10 लाख का जुरमाना लगा दिया है, इन सभी को अब 10-10 लाख रुपए कोर्ट में जमा करने होंगे!

सोनम महाजन ने बताया वो केन से मीडिया वाले है..

आपकी जानकारी के लिए बता दें सिर्फ 10-10 लाख का जुरमाना ही नहीं, कोर्ट ने अभी सिर्फ जुरमाना लगाया है, पर अगली डेट में कोर्ट इन लोगों को सजा देने पर सुनवाई करेगा जिन्होंने लड़की की पहचान को उजागर किया, अच्छी बात ये हैं की इस मामले में 6 महीने तक की सजा भी दी जा सकती है, कोर्ट इस मामले में काफी सख्ती दिखाई है , अभी मीडिया वालो को 10-10 लाख की मार पड़ी है, पर जल्द ही ये लोग 6 महीनो तक के लिए जेल में भी जा सकते है!

दूसरी ओर भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) ने मीडिया से कहा है कि वह यौन अपराधों में सताए गए और आपराधिक मामलों में शामिल बच्चों की पहचान का खुलासा करने से परहेज करे! पीसीआई ने यह निर्देश तब जारी किया जब दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कई मीडिया हाउसों को नोटिस जारी किया क्योंकि उन्होंने जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में बलात्कार और फिर हत्या का शिकार हुई एक नाबालिग बच्ची की पहचान का खुलासा किया था!

पीसीआई ने 16 अप्रैल को जारी एक रिलीज में कहा, ‘पीसीआई अध्यक्ष ने आपराधिक मामलों में शामिल और यौन अपराधों में उत्पीड़ित बच्चों की पहचान का खुलासा करने की मीडिया की प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई है!