केजरीवाल सरकार की इफ्तार पार्टी- सबको दिया न्योता, पर अपने पार्टी के नेताओ के अलावा कोई और नहीं पंहुचा!

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सबका विकास करने में लगी हुई है! लेकिन हाल के दिनों में जो चुनाव नतीजे आये है उससे साफ़ तौर पर जाहिर होता है की उन्हें सबका साथ नहीं मिल रहा है! दूसरी ओर राजधानी दिल्ली में भी एक सरकार है जिसके मुखिया श्री अरविन्द केजरीवाल जी तो गाने गाकर लोगो कहते है “इंसान का इंसान से हो भाईचारा, यही सन्देश हमारा” लेकिन जमीनी सच्चाई केजरीवाल और आम आदमी पार्टी की कुछ और ही है! दिल्ली सरकार की न तो विपक्ष से कोई भाईचारा दिखाई देता है, और न ही दिल्ली के उपराज्यपाल से, हमेशा मुख्यमंत्री और पार्टी के अन्य बड़े नेता उप राजयपाल पर हस्तछेप करने का आरोप लगाते रहे है!

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अब जब बात दिल्ली के मुख्यमंत्री के भाईचारे वाले मैसेज की हो रही है तो अभी 2 दिन पहले ही इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला! मौका था दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित की गई इफ्तार पार्टी का, इस आयोजन को लेकर सर्कार ने विपक्षी नेताओं, सरकारी अफसरों और केंद्र सरकार के कुछ प्रतिनिधियों को समिल्लित होने का न्योता दिया था! हालांकि, दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित इस इफ्तार पति में इनमें से कोई नहीं पहुंचा! जिसपर सीएम अरविंद केजरीवाल ने पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सम्बोधित करते हुए कहा कि “उन्हें पूरा विश्वास है कि ऊपर वाला उनकी सरकार को सभी बाधाओं से उबरने में मदद करेगा क्योंकि ‘उनकी नीयत ठीक है!”

आम आदमी पार्टी नेताओ की माने तो दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित इस इफ्तार पार्टी के लिए उन्होंने प्रोटोकॉल के तहत विपक्ष, उपराज्यपाल, सरकारी अफसरों और केंद्र सरकार के पदाधिकारियों को आमंत्रित किया था! इस पार्टी में शाकाहारी और मांसाहार दोनों तरह के व्यंजन की व्यवस्था की गई थी! लेकिन पार्टी में न तो कांग्रेस के नेता समिल्लित हुए और न ही भाजपा के! इसके अलावे केंद्र सरकार की तरफ से भी किसी ने हिस्सा नहीं लिया!

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विपक्ष के नेता विजेंदर गुप्ता ने भी इस पार्टी में हिस्सा नहीं लिया! उन्होंने कहा कि जब भी इफ्तार पार्टी दी जाती है तो सभी को फ़ोन कॉल करके आमंत्रित किया जाता है! वही कांग्रेस से गठबंधन को लेकर चल रही कोशिशों के बिच कयास लगाए जा रहे थे की कांग्रेस अपने केंद्रीय नेर्तित्व से किसी न किसी को भेजेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ! जबकि दिल्ली के उप राजयपाल राष्ट्रपति के राज्यपालों और उपराज्यपालों की मीटिंग में शामिल होने पहुंचे थे!

अगर बात अफसरों की करें तो, कोई नौकरशाह भी इस कार्यक्रम में नहीं आया! क्युकी केजरीवाल सरकार की अफसरों के प्रति क्या रवैया रहती है ये तो जग जाहिर ही हो चूका है! चीफ सेक्रेटरी अंशू प्रकाश के साथ कथित तौर पर मारपीट की वजह से अफसरों और दिल्ली सरकार के बीच तल्खी काफी बढ़ी हुई थी! वही मीडिया से प्राप्त खबरों के मुताबिक एक शीर्ष अधिकारी ने कहा, “इस तरह के कार्यक्रम राजनीतिक होते हैं। शायद ही कोई अधिकारी इनमें पहुंचता है!”

कुल मिलकर यह कहना उचित होगा की केजरीवाल बिलकुल अलग थलग पड़ते जा रहे है! गठबंधन के राजनीती ke दौर में उनका दमन कोई भी थमने को तैयार नहीं है!

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