सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए केजरीवाल ने लातूर को भी नहीं छोड़ा

नई दिल्ली: केंद्र सरकार और महाराष्ट्र की राज्य सरकार दोनों लातूर के लोगो के बिच पानी पहुँचाने के जद्दो-जेहद में कई दिनों से लगे हुए थे और आखिरकार मोदी सरकार ने 5 लाख लीटर पानी का पहला खेप पहुंचाया! आपको इस बात से हैरानी नहीं होनी चाहिए की कुछ नेता इस भीषण समस्या पर भी राजनीती करने से नहीं चूकते, अब आप सर जी को ही देख लो जैसे ही उन्हें पता चला की केंद्र सरकार पानी की वयवस्था करने में दिन रात एक किये हुए है उन्होंने आव देखा न ताव और ट्विटर पर पोस्ट डाल दिया, उन्होंने दिल्ली के लोगो से लातूर के लिए पानी बचाने को कहा!

अगर वाकई उनके मन में मदद करने की मंसा थी तो पहले इस मुद्धे पर महाराष्ट्र की राज्य सरकार और केंद्र से बात-चित करनी चाहिए थी लेकिन केजरीवाल तो ठहरे मौका परस्त उन्हें जैसे ही कोई मौका दीखता है अपना उल्लू सीधा करने पहुंच जाते है, चाहे वो समस्या लोगो की भावनाओ से क्यों न जुड़ा हो! इनकी इन हरकतों की वजह से ऐसा प्रतीत होता है जैसा इनके जिंदगी का एखई मकशद है किसी तरह से टीवी और अख़बार में बने रहना, अब एक बात तो साफ़ है कि सर जी से सिर्फ बहसबाजी करा लो !

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कुछ दिनों पहले की बात है केजरीवाल पंजाब में चुनावी सभा को सम्बोधित कर रहे थे, पंजाब में उन्होंने कहा कि पंजाब को हरियाणा को पानी नहीं देना चाहिए, ये भी उन्होंने खबरों में बने रहने के लिए किया क्युकी वो भली-भांति जानते है की जब पंजाब हरियाणा को पानी सप्लाई करता है तभी हरियाणा आगे उसे दिल्ली के लोगो के लिए भेजता है, इस वयान के बाद केजरीवाल की काफी खिचाई हुयी और हरियाणा सरकार ने भी साफ़ शब्दों में दिल्ली को पानी देने से मना कर दिया!

हलाकि बाद में सतलुज-यमुना लिंक (SYL) मामले की कोर्ट में सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने कहा की वो (दिल्ली सरकार) SYL मुद्दे पर हरयाणा को समर्थन करती है और पंजाब हरयाणा को मिलने वाली पानी नहीं रोक सकता है!

अब माजरा बिलकुल साफ है कि जिस राज्य की जलापूर्ति दूसरे राज्यों पर निर्भर है वो किसी अन्य राज्य की पानी की समस्या का हल कैसे निकल सकता है! केजरीवाल का यह वयान राजनीती से प्रेरित था और सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए था!