बहुत चालक निकली मायावती, सरकारी बंगला बचाने के लिए बड़ी चालाकी से दलितों के आड़ में खेला ये दांव!

लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगले खाली करवाए जा रहे हैं, मायावती, राजनाथ सिंह, कल्याण सिंह, अखिलेश यादव और मुलायम सिंह सभी को सरकारी बंगला खाली करने के आदेश दिए गए हैं!अखिलेश यादव ने तो इस मामले में भू जनता की पूरी सहानुभूति बटोरने की कोशिश की, उन्होंने अपने और पिता जी के लिए माकन किराये पर ढूंढने और लेने की बात तक कह डाली! हलाकि ये सभी जानते है कि इन्होने सत्ता से कितना पैसा बनाया है!

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अब तक प्राप्त सूचना के अनुसार सभी मुख्यमंत्री सरकारी बंगला खाली करने के लिए तैयार हो गए हैं लेकिन मायवती ने चालाकी दिखाते हुए बंगले पर कांशीराम का कब्जा करवा दिया है ताकि दलित लोग बंगले से इमोशनल अटैच हो जाएं और मायावती सुप्रीम कोर्ट के आदेश को दलित विरोधी बता सकें!

बात दरअसल ये है कि मायावती ने अपने बंगले पर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल का बोर्ड लगा दिया है. जानकारी के अनुसार यह मंगला मायावती के नाम से आवंटित है लेकिन मायावती ने इसका नाम बदलकर दलित पॉलिटिक्स खेल दी है. मायावती का सरकार बंगला 13ए माल एवेन्यू पर है और पास में ही उनका निजी मकान 9माल एवेन्यू है। इसकी रंगाई-पुताई का काम तेजी से चल रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही मायावती इसमें शिफ्ट होंगी और सरकारी बंगले को कांशीराम यादगार विश्राम स्थल का नाम देकर उसपर भी कब्जा करके रखेंगी!

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मायावती भारतीय राजनीती में एक ऐसा नाम जिन्हे लोग दलितों के नेता के नाम से जानते है, लेकिन मायावती ने दलित समाज के उत्थान के लिए कुछ नहीं किया सिर्फ अपना जेब भरा है! कभी अपनी प्रतिमा बनवाती है, तो कभी हाँथियो के पुतले सार्वजनिक सथलो और पार्को में लगवाती है! उनके नाम पर रजिस्टर्ड अरबो की सम्पति भी सामने आ चुकी है! मायावती का नाम हमेशा से विवादों में जुड़ा रहा है! मायावती राजनीती में आयी तो थी दलितों के पैरोकार बनकर लेकिन उनके राजनीतिक जीवन पर नजर डाले तो पता चलता है कि वो सिर्फ अवसरवाद की राजनीती करती है!

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