मदर्स डे स्पेशल: बूढ़े मां-बाप को छोड़ने वाले बेटों के खिलाफ मोदी सरकार लेने जारही है ऐसा फैसला जो सभी को जानना चाहिए !

पुरे विश्व भर में आज (13 मई) को मदर्स डे मनाया जा रहा है. सोशल मीडिया पर लोग मां के प्रति अपनी भावनाएं और तस्वीरें शेयर कर रहे हैं. लेकिन शर्म और अफसोश की बात ये है कि बदलते दौर में मां-पिता की उपेक्षा की घटनाएं भी काफी बढ़ गई हैं. जिसमे बेटे अपने माँ बाप को बुढ़ापे में छोड़ देते हैं। उन्हें प्रताड़ित करते हैं। जिन माँ बाप ने पाल पास कर अपने बच्चो को लायक बनाया बाद में वही बच्चे उनका सहारा बनने के बजाए उन्हें छोड़ देते है

इन बातों के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली मौजूदा केंद्र सरकार कानून में कुछ ऐसे बदलाव लाने की तैयारी में है, जिसके बाद कोई भी बेटा बुजुर्ग मां-बाप को अकेला छोड़ने से पहले हिचकेंगे. कानून में बदलाव कर प्रावधान किया जा रहा है कि अगर माता-पिता को छोड़ा या उनसे र्दुव्‍यवहार किया तो अब छह महीने की जेल हो सकती है.

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि बच्चों की परिभाषा में दत्तक या सौतेले बच्चों, दामाद और बहुओं, पोते – पोतियों, नाती-नातिनों और ऐसे नाबालिगों को भी शामिल करने की सिफारिश की गयी है जिनका प्रतिनिधित्व कानूनी अभिभावक करते हैं. मौजूदा कानून में सिर्फ सगे बच्चे और पोते – पोतियां शामिल हैं. यानी की अब जो कानून लाने की तैयारी है वो एक शानदार पहल है। इसमें मोदी सरकार की तारीफ बनती है ,

बच्चे देखभाल से करे इनकार तो कानून का सहारा लें मां-पिता।
मंत्रालय ने माता – पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल और कल्याण कानून, 2018 का मसौदा तैयार किया है. कानूनी रूप मिलने के बाद यह 2007 के पुराने कानून की जगह लेगा. कानून में मासिक देख – भाल भत्ता की 10,000 रुपये की अधिकतम सीमा को भी समाप्त कर दिया गया है. यदि बच्चे माता-पिता की देखभाल करने से इनकार कर देते हैं तो वह कानून का सहारा ले सकते हैं.